18 मिनट में 108 सूर्य नमस्कार – ग्रुप वर्ल्ड रिकॉर्ड
जयपुर, राजस्थान।
शक्ति के महापर्व के पावन अवसर पर Yogpath Foundation, जयपुर के तत्वावधान में योग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष योगाचार्य सत्यपाल सिंह के प्रेरणादायी नेतृत्व में प्रतिभागियों ने सबसे तेज़ गति से 108 Surya Namaskar (Sun Salutation) पूर्ण कर ग्रुप वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया।

भव्य शुभारंभ और ऊर्जामय वातावरण
यह भव्य आयोजन रविवार प्रातः 6:00 बजे होटल क्लॉक, आमेर, जयपुर में दीप प्रज्वलन एवं शंखनाद के साथ आरंभ हुआ। मंत्रोच्चारण के साथ किए गए सूर्य नमस्कारों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्रतिभागियों ने अनुशासन, एकाग्रता और सामूहिक शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए सूर्य की ऊर्जा और योग शक्ति का आह्वान किया।

योग को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में कदम
इस वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य योग की शक्ति और उसके वैज्ञानिक लाभों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करना था। यह ऐतिहासिक उपलब्धि Yoga Book of Records — दुनिया की एकमात्र योग विश्व-कीर्तिमानों को समर्पित रिकॉर्ड बुक — में दर्ज की गई।
18 मिनट में 108 सूर्य नमस्कार: नया कीर्तिमान
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित Rakesh Bhardwaj, सीईओ, योगा बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और रिकॉर्ड गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने मात्र 18 मिनट में 108 सूर्य नमस्कार पूर्ण कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया।

प्रमाणपत्र एवं सम्मान समारोह
इस अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें—
- योगाचार्य सत्यपाल सिंह को संस्था के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट
- योगाचार्य रवि प्रकाश शर्मा को कन्वीनर सर्टिफिकेट
- योगाचार्य प्रभाकर श्रीवास्तव, योगाचार्य अंकित टांक एवं योगाचार्य नेहा सिंह जादौन को को-कन्वीनर सर्टिफिकेट
- सभी प्रतिभागियों को गोल्ड मेडल एवं प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सहभागिता और उपलब्धि
कन्वीनर योगाचार्य रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें से 79 प्रतिभागियों ने निर्धारित समय से पहले ही 108 सूर्य नमस्कार पूर्ण कर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की।
निष्कर्ष
योगपथ फाउंडेशन, जयपुर द्वारा रचा गया यह कीर्तिमान न केवल योग के अनुशासन और सामूहिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वास्थ्य, साधना और समर्पण के मार्ग पर प्रेरित करने वाला एक प्रेरणास्रोत भी है। यह उपलब्धि योग को जन-जन तक पहुँचाने और भारत की प्राचीन योग परंपरा को विश्व में नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

